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Thursday, June 4, 2020

दुनिया खूबसूरत है

युहीं कहीं बैठे बैठे मन में सवाल आया
ये दुनिया सच में इतनी बुरी तो नहीं!
फिर दूर तक नज़र घुमा कर देखा
कुछ मंदिर के सामने लाचार बैठे
कुछ सिग्नल के पास हाथ फैलाते
कुछ सड़क किनारे अफ़सोस जताते
कोई किसीसे लड़ते !
कोई बाइक को पर करते
कोई अपनी कार को आगे निकालते
ज़ोर ज़ोर से हॉर्न बजाते!
कुछ ढेर साडी गाड़ियों की आवाजाही से
निकालते धुएं जो आसमान को काला कर रही
कहीं रास्तो को तोडा फोड़ा जा रहा सुविधा केलिए
कहीं दूर दूर तक हरे भरे पेड़ कटे जा रहे इंसानो केलिए !
कहीं तालाब और नदियों का पानी सूखा
कहीं झील सूखती नज़र आयी
कहीं जानवर को मरते काटते
दिखाई दिए मंज़र !
कहीं खूब लड़ते झगड़ते ज़मीनो और सत्ता केलिए
दिखे लोग
फिर भी सब कहते है दुनिया खूबसूरत है
लगता है दुनिया खूबसूरत थी
हम सबने उसे  बदसूरत बनाने का ठेका ले ही लिया है !

Monday, December 17, 2018

सबकुछ है यहाँ ...

आकाश में परिंदो की उड़ान ,धरा पर समुन्दर की लहेरो का बहाव
समाज का  दूर दृष्टिकोण ,व्यक्तिगत जीवन की चहलपहल 
रात का अँधेरा ,दीन का उजाला ,सूरज की रौशनी ,चाँद की चमक 
साहित्य की कारीगरी ,उपन्यासों के पन्ने और ग्रंथो का सार 
शब्दों का मायाजाल ,पिरोये मोती और मीठे बोल 
सुहावन बागबान और बुद्धिजीवी की स्वतंत्रता सबकुछ है यहाँ,सबकुछ .... 

Wednesday, June 13, 2018

उम्मीद



खुश थी मैं अपने इच्छाओं का गला घोटकर
खुश थी मैं इस आज में अपने सपनो को पीछे छोड़कर
मगर तुम्हारे जुबान से निकले उन् शब्दों ने
मेरी अधमरी सी कल्पनाओ में सांसे भर दी
और झकजोर दिया मेरे मस्तिष्क को
कहाँ , डूबी हुई जी रही थी मैं आज में
कहाँ , मग्न सी थी मैं अपने आज में
तुमने उसे अँधेरा समझ मुझको
कभी न साथ देनेवाले किरणों का शहर  दिखा दिया.....

Friday, August 11, 2017

कठोरता और प्रेम ............

एक पौधे को एक हरा भरा पेड़ बनाने में उसकी देखभाल जो करनी होती हैए अनुभव हैं मुझे, मगर देखा हैं पौधे भी कभी कभी व्यवस्थित जगह न मिलने से इधर उधर रुख कर लेते हैं अपने आपको बढ़ने केलिए .मगर उसकी देखभाल सही ढंग से हो तो वो छोटे जगह में भी हरा भरा पेड़ होजाता हैं !कुछ ऐसा ही नदियों के साथ भी, वास्तविक दिशा नहीं  मिल पाती फिर इधर उधर बहे जाते हैं !नदिया अपनी दिशा खुद तय करते हैं, अगर उन्हें कठोरता और संसाधनों की दृष्टि से रस्ते नए दिए जाए तो वो भी अपना रुख बदल कर सही ढंग से प्रवह करने लगती हैं ठीक उसी तरह बच्चोको नयी दिशा ,नया ज्ञान,नयी वास्तविकताओं से अवगत करने में माता  पिता, शिक्षक हर बड़े छोटे ,सजीव निर्जीव वस्तु  कारगर ठहर सकते हैं !आवश्यकता बस इतनी की वो सही समय कठोरता और प्रेम दोनों को संतुलित बनाये हुए उनके साथ व्यवहार करे..!!!!!!!!
                                                                            Manjusha

Monday, February 20, 2017

learning experience : anubhav

learning experience : anubhav: सटीक बात करनेवालोंकी बात भी रहे जाती है और मान भी अधिक बोलनेवाले अक्सर अपनी मर्यादा भूल जाया करते है मजलिसी में बैठ कर अवमाननाओका बखेड़ा...

anubhav

सटीक बात करनेवालोंकी बात भी रहे जाती है और मान भी
अधिक बोलनेवाले अक्सर अपनी मर्यादा भूल जाया करते है
मजलिसी में बैठ कर अवमाननाओका बखेड़ा करते है ...
और तो और क्या सच और क्या झूठ बोल रहे है ...
इसका भी उन्हें होश नहीं होता है ....
ऐसे लोगोंसे और ऐसी मजलिसी से (महेफिल)
दूर ही रहना सही होता है ...

Wednesday, January 27, 2016

naghme....

khushiyon ko dhundhte dhunte pahoch gaye uss jahan me
dard ko bhulate bhulate pahoch gaye uss mazar pe....
tuze haqikat me chahte chahte kho baithe apne aap me
badi zalim si lagi ye sari kahaniya to bss ja  pahoche tere kaid me