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Monday, December 17, 2018

सबकुछ है यहाँ ...

आकाश में परिंदो की उड़ान ,धरा पर समुन्दर की लहेरो का बहाव
समाज का  दूर दृष्टिकोण ,व्यक्तिगत जीवन की चहलपहल 
रात का अँधेरा ,दीन का उजाला ,सूरज की रौशनी ,चाँद की चमक 
साहित्य की कारीगरी ,उपन्यासों के पन्ने और ग्रंथो का सार 
शब्दों का मायाजाल ,पिरोये मोती और मीठे बोल 
सुहावन बागबान और बुद्धिजीवी की स्वतंत्रता सबकुछ है यहाँ,सबकुछ .... 

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