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learning from everyone...for everything...

Monday, December 17, 2018

सबकुछ है यहाँ ...

आकाश में परिंदो की उड़ान ,धरा पर समुन्दर की लहेरो का बहाव
समाज का  दूर दृष्टिकोण ,व्यक्तिगत जीवन की चहलपहल 
रात का अँधेरा ,दीन का उजाला ,सूरज की रौशनी ,चाँद की चमक 
साहित्य की कारीगरी ,उपन्यासों के पन्ने और ग्रंथो का सार 
शब्दों का मायाजाल ,पिरोये मोती और मीठे बोल 
सुहावन बागबान और बुद्धिजीवी की स्वतंत्रता सबकुछ है यहाँ,सबकुछ .... 

Wednesday, June 13, 2018

उम्मीद



खुश थी मैं अपने इच्छाओं का गला घोटकर
खुश थी मैं इस आज में अपने सपनो को पीछे छोड़कर
मगर तुम्हारे जुबान से निकले उन् शब्दों ने
मेरी अधमरी सी कल्पनाओ में सांसे भर दी
और झकजोर दिया मेरे मस्तिष्क को
कहाँ , डूबी हुई जी रही थी मैं आज में
कहाँ , मग्न सी थी मैं अपने आज में
तुमने उसे अँधेरा समझ मुझको
कभी न साथ देनेवाले किरणों का शहर  दिखा दिया.....