कठोरता और प्रेम ............
एक पौधे को एक हरा भरा पेड़ बनाने में उसकी देखभाल जो करनी होती हैए अनुभव हैं मुझे, मगर देखा हैं पौधे भी कभी कभी व्यवस्थित जगह न मिलने से इधर उधर रुख कर लेते हैं अपने आपको बढ़ने केलिए .मगर उसकी देखभाल सही ढंग से हो तो वो छोटे जगह में भी हरा भरा पेड़ होजाता हैं !कुछ ऐसा ही नदियों के साथ भी, वास्तविक दिशा नहीं मिल पाती फिर इधर उधर बहे जाते हैं !नदिया अपनी दिशा खुद तय करते हैं, अगर उन्हें कठोरता और संसाधनों की दृष्टि से रस्ते नए दिए जाए तो वो भी अपना रुख बदल कर सही ढंग से प्रवह करने लगती हैं ठीक उसी तरह बच्चोको नयी दिशा ,नया ज्ञान,नयी वास्तविकताओं से अवगत करने में माता पिता, शिक्षक हर बड़े छोटे ,सजीव निर्जीव वस्तु कारगर ठहर सकते हैं !आवश्यकता बस इतनी की वो सही समय कठोरता और प्रेम दोनों को संतुलित बनाये हुए उनके साथ व्यवहार करे..!!!!!!!!
Manjusha
एक पौधे को एक हरा भरा पेड़ बनाने में उसकी देखभाल जो करनी होती हैए अनुभव हैं मुझे, मगर देखा हैं पौधे भी कभी कभी व्यवस्थित जगह न मिलने से इधर उधर रुख कर लेते हैं अपने आपको बढ़ने केलिए .मगर उसकी देखभाल सही ढंग से हो तो वो छोटे जगह में भी हरा भरा पेड़ होजाता हैं !कुछ ऐसा ही नदियों के साथ भी, वास्तविक दिशा नहीं मिल पाती फिर इधर उधर बहे जाते हैं !नदिया अपनी दिशा खुद तय करते हैं, अगर उन्हें कठोरता और संसाधनों की दृष्टि से रस्ते नए दिए जाए तो वो भी अपना रुख बदल कर सही ढंग से प्रवह करने लगती हैं ठीक उसी तरह बच्चोको नयी दिशा ,नया ज्ञान,नयी वास्तविकताओं से अवगत करने में माता पिता, शिक्षक हर बड़े छोटे ,सजीव निर्जीव वस्तु कारगर ठहर सकते हैं !आवश्यकता बस इतनी की वो सही समय कठोरता और प्रेम दोनों को संतुलित बनाये हुए उनके साथ व्यवहार करे..!!!!!!!!
Manjusha

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